
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर थाईलैंड पहुंचे, जहां उन्होंने अपने समकक्ष पाएटोंगटार्न चिनावाट के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता की. इस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और थाईलैंड मुक्त, खुले, समावेशी और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था का समर्थन करते हैं. हम विस्तारवाद नहीं, बल्कि विकासवाद की नीति में विश्वास रखते हैं । इस मुलाकात में दोनों देशों ने व्यापार, रक्षा, सुरक्षा, कनेक्टिविटी, पर्यटन, शिक्षा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई.
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों और थाईलैंड के बीच पर्यटन, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया. इसके अलावा, एमएसएमई, हथकरघा और हस्तशिल्प उद्योगों में आपसी सहयोग को लेकर समझौते किए गए. पीएम मोदी ने कहा, भारत और थाईलैंड के संबंध सदियों पुराने हैं और हमारी गहरी सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक जड़ों से जुड़े हुए हैं. बौद्ध धर्म के प्रसार ने दोनों देशों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
अयुत्थाया से नालंदा तक विद्वानों का आदान-प्रदान हुआ है और रामायण की कहानियां थाई लोगों के जीवन का हिस्सा हैं । प्रधानमंत्री मोदी ने थाईलैंड सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके दौरे के दौरान 18वीं शताब्दी की रामायण भित्ति चित्रों पर आधारित एक स्मारक डाक टिकट जारी किया गया । प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि थाईलैंड भारत की एक्ट ईस्ट नीति और इंडो-पैसिफिक विजन में एक विशेष स्थान रखता है. उन्होंने कहा, भारत और थाईलैंड मुक्त, खुले, समावेशी और नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थन करते हैं. हमने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का निर्णय लिया है ।
व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों और थाईलैंड के बीच पर्यटन, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बल दिया. इसके साथ ही, आपसी व्यापार, निवेश और व्यापारिक लेन-देन को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई. इसके अलावा, एमएसएमई, हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्रों में सहयोग के लिए समझौते किए गए ताकि दोनों देशों की पारंपरिक कलाओं को वैश्विक मंच पर पहचान मिले ।
प्रधानमंत्री मोदी को थाई प्रधानमंत्री ने भेंट की पवित्र ग्रंथ
प्रधानमंत्री मोदी को थाई प्रधानमंत्री पैतोंगटार्न शिनावात्रा ने वर्ल्ड टी-पिटक: सज्झाय फोनेटिक एडिशन भेंट किया. यह ग्रंथ थाई सरकार द्वारा 2016 में थाईलैंड के राजा भूमिबोल अदुल्यादेज और रानी सिरिकित के 70 वर्षीय शासनकाल की स्मृति में प्रकाशित किया गया था ।